Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

तला आलू है गम्भीर बीमारियों का कारण

आयुर्वेद के अनुसार आलू शीतल, रुक्ष, पचने में भारी, कफ तथा वायु को बढ़ानेवाला एवं रक्तपित्त को नष्ट करनेवाला है ।

आचार्य चरक ने सभी कंदों में आलू को सबसे अधिक अहितकर बताया है । इसके नियमित सेवन से कब्ज, गैस आदि पाचनसंबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं ।

आलू को तेल में तलने से वह विषतुल्य काम करता है । तले हुए आलू के पदार्थ, जैसे - चिप्स, पकौड़े आदि पचने में भारी व वात-पित्त-कफवर्धक होते हैं । तले हुए चिप्स के ऊपर मिर्च, राई, नमक, गरम मसाला बुरक के खाने से स्वप्नदोष, शुक्रस्राव, श्वेतप्रदर आदि समस्याएँ होती हैं ।

* आधुनिक संशोधनों के निष्कर्ष :

(1) उच्च तापमान पर या अधिक समय तक आलू को तेल में भूनने या तलने से उसमें स्वाभाविक ही एक्रिलामाइड का स्तर बढ़ता है, जो कि कैंसर-उत्पादक तत्त्व सिद्ध हुआ है ।

(2) एक अमेरिकन अनुसंधान के अनुसार उबला हुआ, तला हुआ, फ्रेंच फ्राइज या चिप्स आदि किसी भी रूप में अधिक बार आलू का सेवन करने से उच्च रक्तचाप (hypertension)का खतरा बढ़ता है ।

(3) कुछ शोधकर्ताओं ने तले हुए आलू के अधिक सेवन से मृत्यु-दर में वृद्धि होती पायी । इसका सेवन मोटापा व मधुमेह (diabetes) का भी कारण बन सकता है ।