Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

आरोग्य, अध्यात्म, पर्यावरण-रक्षा व सद्गति का अमृतस्रोतः तुलसी पूजन दिवस

हर मनुष्य चाहता है :

(1) शारीरिक स्वास्थ्य

(2) मानसिक स्वास्थ्य

(3) बौद्धिक विकास

(4) आर्थिक सम्पन्नता

(5) आध्यात्मिक उन्नति 

(6) पारिवारिक सुख-शांति 

(7) सद्गति, मोक्ष या पारलौकिक ऊँची गति ।

मनुष्य की इन माँगों को पूरा करने में मददरूप माता तुलसी प्रकृति का अनमोल उपहार हैं । आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आरोग्यवर्धक गुणों से परिपूर्ण तुलसी घर में लगते ही वातावरण को आध्यात्मिक स्पंदनों से भर देती है तथा कई जीवाणुओं एवं रोगाणुओं का नाश कर देती है । वातावरण की स्वच्छता एवं पवित्रता, प्रदूषण का शमन, घर-परिवार के सदस्यों की नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और उनकी आरोग्यता की जड़ें मजबूत करना आदि अनेक लाभ तुलसी से होते हैं । 

शास्त्रों में है तुलसी की अद्भुत महिमा

नारद पुराण में श्री सनकजी कहते हैं : ‘‘जिस घर में तुलसी पूजित होती हैं वहाँ प्रतिदिन सब प्रकार के श्रेय की वृद्धि होती है ।’’

ब्रह्मवैवर्त पुराण में भगवान नारायण कहते हैं : ‘‘परम साध्वी तुलसी पुष्पों में सार हैं । ये पूजनीया तथा मनोहारिणी हैं । सम्पूर्ण पापरूपी ईंधन को भस्म करने के लिए ये प्रज्वलित अग्नि की लपट के समान हैं ।’’

स्कंद पुराण में ब्रह्माजी कहते हैं : ‘‘यदि कोई तुलसी-संयुक्त जल में स्नान करता है तो वह सब पापों से मुक्त हो भगवान विष्णु के लोक में आनंद का अनुभव करता है । जो लगाने के लिए तुलसी का संग्रह करता है और लगा के तुलसी का वन तैयार कर देता है वह उतने से ही पापमुक्त हो ब्रह्मप्राप्ति का अधिकारी हो जाता है ।’’

अगस्त्य संहिता के अनुसार ‘‘तुलसी-वन के चारों ओर एक कोस (3.2 किलोमीटर) तक का स्थान गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है ।’’

तुलस्युपनिषद् में प्रार्थना की गयी है : ‘हे तुलसी ! अवृक्ष (चैतन्यरूप) होते हुए भी तुम वृक्षरूप में दिखाई देती हो, (इसलिए) मेरी जड़ता (वृक्षत्व) का विनाश करो ।’

विज्ञान भी गा रहा तुलसी की महिमा

पाश्चात्य वैज्ञानिकों ने तुलसी पर अनुसंधान किये तो उन्हें पता चला कि हिन्दुओं ने तुलसी को अपने जीवन में धार्मिक स्वरूप देकर जो पूजनीय स्थान दे रखा है वह अनुचित या ढकोसला नहीं है । वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया कि ‘रोज तुलसी के पत्ते खाने से कैंसर नहीं होता और इसका तेल क्षयरोग (ढ.इ.) के कीटाणुओं को समाप्त कर देता है ।’ पाश्चात्य डॉक्टरों ने अपने अनुभव के आधार पर बताया है कि ‘आँतों की सफाई का श्रेष्ठ उपाय तुलसीदल को चबाकर खाना है । स्त्रीरोगों पर तुलसी के सेवन का बहुत ही गुणकारी प्रभाव पड़ता है ।’

जैसी दृष्टि, वैसा लाभ

पूज्य बापूजी के सत्संग-वचनामृत में आता है : ‘‘विज्ञानी अभी बोलते हैं कि तुलसी का सेवन करने से फलानी-फलानी बीमारियाँ मिटती हैं लेकिन मैं यह नहीं कहता हूँ कि फलानी बीमारी मिटाने के लिए तुलसी का सेवन करो । तुलसी-सेवन से बीमारियों में फायदे तो होंगे परंतु यदि भगवत्प्रसाद समझ के सेवन करोगे तो अंदर में भगवद्भाव, भगवत्प्रीति मिलने से आधिभौतिक रोग मिटने के साथ आपकी आध्यात्मिक उन्नति भी होगी ।

स्वास्थ्य व बुद्धि वर्धक तुलसी

बहुतांश बच्चों के पेट में कृमि होते हैं । सुबह खाली पेट तुलसी के 5-7 पत्ते चबा के खा लें फिर एक गिलास पानी इस तरह पियें कि तुलसी के कण दाँतों के बीच न रह जायें । इससे कृमि-नाश होता है और स्मृतिशक्ति बढ़ती है ।

तुलसी के पत्ते पीसकर उनका रस शरीर पर रगड़ के नहायें तो शरीर में एक प्रकार की जैव विद्युत, आभा (र्रीीर) उत्पन्न होती है, बिजली जैसी स्फूर्ति आने लगती है ।

दरिद्रतानाशक व सद्गतिप्रदायक

कैसा भी अभागा व्यक्ति हो, कैसा भी गरीब-दुःखी परिवार हो, यहाँ तक कि समाज उसे बिल्कुल बेकार मानता हो, ऐसे लोग भी अगर पानी का एक लोटा भर के उसमें तुलसी के 5-10 पत्ते डालकर उसमें देखते हुए 10-15 मिनट तक ‘हरि ॐ’ का जप करें, फिर वह जल घर में छिड़कें और उसका आचमन लें तो घर का तो क्या पड़ोस का वातावरण भी पवित्र हो जायेगा और उसका भाग्य सँवरने लगेगा ।

जाने-अनजाने तुलसी के पौधे के पास एक युवक की मृत्यु हुई । यमदूत उसको नरक में ले जानेवाले थे पर वहाँ पर तुलसी का पौधा था तो उसकी सद्गति हो गयी । यमदूत हाथ मलते हुए चले गये । ऐसी है तुम्हारी तुलसी मैया ! 

सावधानी : मध्याह्नकाल, रात्रि तथा दोनों संध्याओं में तुलसी न तोड़ें । रविवार को तुलसी तोड़नी नहीं, खानी नहीं, देनी नहीं चाहिए ।’’

आओ मनायें 

तुलसी पूजन दिवस

एक समय हर घर में तुलसी का बगीचा होता था । तुलसी को जल देना व परिक्रमा करना नारियाँ अपने सौभाग्य की सुरक्षा हेतु अपना कर्तव्य समझती थीं । पाश्चात्य चकाचौंध से प्रभावित हो के लोग तुलसी की महत्ता भूलते गये और तुलसी को घर से बाहर कर दिया । इससे अशांति, बीमारियों, कलह, प्रदूषण आदि की बहुत वृद्धि हुई । करुणासिंधु पूज्य बापूजी से मानव-समाज की यह दुर्दांत पीड़ा सहन नहीं हुई । आपश्री ने तुलसी की महिमा व उपयोगिता जन-जन तक पहुँचाने हेतु पिछले 60 वर्षों से अभियान चलाये रखा । शास्त्रवर्णित तुलसी की महत्ता को संकलित कर उसे समाज के सामने साररूप में रखा । उसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए 2014 में 25 दिसम्बर को ‘तुलसी पूजन दिवस’ पर्व मनाने की शुरुआत की । यह पर्व अब विश्वव्यापी हो गया है । तुलसी-पूजन मनोबल, बुद्धिबल, चारित्र्यबल व आरोग्यबल बढ़ानेवाला तथा मानसिक अवसाद, आत्महत्या आदि से रक्षा करनेवाला है ।

विश्वगुरु भारत सप्ताह (25 से 31 दिसम्बर)

क्रिसमस व बीते वर्ष की विदाई पर पाश्चात्य अंधानुकरण से नशाखोरी, व्यभिचार, आत्महत्या आदि कुप्रवृत्तियों की वृद्धि होती है । यह बात कई अनुसंधानों और सर्वेक्षणों से सामने आ रही है ।

एक वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार ‘ख्रिस्ती नूतन वर्ष पर आत्महत्या की दर में तेजी से वृद्धि होती है । 25 दिसम्बर से 1 जनवरी के बीच हृदयाघात से मरनेवालों की संख्या साल के किसी भी अन्य समय की तुलना में अधिक होती है ।’ इसे ‘क्रिसमस हार्ट सिन्ड्रोम’ नाम दिया गया है ।

एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ व्याख्याता के अनुसार ‘क्रिसमस के समय खाद्य पदार्थों, शराब और नशे की चीजों का अत्यधिक सेवन किया जाता है । इस दौरान मानसिक तनाव, यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा में भी वृद्धि होती है ।’

इस तबाही से बचाने के लिए पूज्य बापूजी द्वारा 2014 से ‘विश्वगुरु भारत सप्ताह’ की शुरुआत की गयी । इसका उद्देश्य बताते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : ‘‘25 से 31 दिसम्बर तक क्रिसमस और बीते वर्ष की विदाई में लोग मांस-दारू खाते-पीते हैं, अपराध करते हैं... इससे कई लड़के-लड़कियाँ, कई लोग बरबाद हो जाते थे । तुलसी पूजन दिवस, गौ-पूजन, सत्संग का दिवस... इन कार्यक्रमों से सातों दिन सत्प्रवृत्तियों में व्यस्त रहने से समाज पाश्चात्य दुष्प्रवृत्तियों से बचे और उसकी प्रवृत्ति कुछ सात्त्विक हो जाय इसलिए यह कार्यक्रम मैंने शुरू कराया ।’’

विश्वगुरु भारत सप्ताह के अंतर्गत तुलसी-पूजन, जप-माला पूजन, गौ-पूजन, हवन, गौ-गीता-गंगा जागृति यात्रा, सत्संग आदि कार्यक्रम आयोजित होते हैं । सभी इनका लाभ लें तथा औरों को भी लाभान्वित करें ।