Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

युवाधन की रक्षा हेतु एक विश्वव्यापी अभियान

मोह की आँधी में संयम का दीप

जरा इधर देख लिया तो क्या है, जरा उससे बात कर ली तो क्या है, जरा-सा हाथ मिला लिया तो क्या है, जरा एक-दूसरे को फूल दे दिया, ‘आई लव यू’ बोल दिया तो क्या है ? अरे तबाही है मूर्खो ! लड़का-लड़की एक-दूसरे को प्रेम करें तो रज-वीर्य नाश होगा, जल्दी स्मरणशक्ति का नाश होगा, बुढ़ापा आयेगा, चिड़चिड़े होंगे । यौन संक्रमित रोगों, नपुंसकता, मानसिक अवसाद और आत्महत्या के शिकार होकर तबाह होंगे । माँ-बाप का अपमान करनेवाले बनेंगे । अपने भारत के युवाधन को बरबाद करने की इस पाश्चात्य हरकत को देखकर मैं अंतःकरण में बहुत चिंतित हुआ, मैंने भी ब्रह्माजी जैसा भीतर गोता लगाया कि ‘इसका उपाय क्या है ?’ जैसे ब्रह्माजी को तुरंत उपाय मिल गया ऐसे ही मेरे को भी युवाधन की रक्षा का उपाय मिल गया और मैंने ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ चालू कर दिया । अभी तो मातृ-पितृ पूजन दिवस का गीत कई भाषाओं में चल पड़ा है और बहुत लोगों को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने से फायदा हुआ है ।

अब खुदावाले भी बाबा आशाराम की सराहना करते हैं, रामवाले, कृष्णवाले, ईसावाले भी भीतर से मानते हैं । मेरा किसी ईसाई या मुसलमान अथवा किसी जाति से विरोध, द्वेष नहीं है । मैं किसी जाति, व्यक्ति, पार्टी अथवा किसीका भी अहित नहीं चाहता हूँ । मैं चाहता हूँ कि सब झोली भर लें, सब अपने जीवन में ‘सत्यं शिवं सुन्दरम्’ का माधुर्य पा लें । 

वे चाहते सब झोली भर लें,

निज आत्मा का दर्शन कर लें ।।

समाज की सबसे बड़ी चुनौती

बोलते हैं कि ‘जलवायु प्रदूषण की समस्या बड़ी चुनौती है, फलानी बड़ी चुनौती है, आर्थिक संकट की चुनौती है, यह चुनौती है...’ अरे, सबसे बड़ी चुनौती है किशोर-किशोरियों की तबाही करनेवाला वेलेंटाइन डे ! वेलेंटाइन डे मना के किशोर-किशोरियाँ कोमल अवस्था में अपनी तबाही कर रहे थे । उस तबाही को रोकने के लिए मैंने मातृ-पितृ पूजन दिवस चलाया परंतु इतना काफी नहीं है, शिक्षा, साहित्य एवं प्रचार-प्रसार के माध्यमों द्वारा और भी संयम की महिमा का प्रचार करो । नहीं तो विश्व के सारे बच्चे तबाही की तरफ बहुत तेजी से जा रहे हैं । एंड्रोइड मोबाइल, कम्प्यूटर या लैपटॉप के द्वारा पॉर्न वेबसाइट्स और ब्लू फिल्में देखते हैं और मैं बोल नहीं सकता हूँ ऐसी क्या-क्या हरकतें करके अपनी तबाही कर लेते हैं । 9वीं-10वीं तक तो परीक्षा में अंक ठीक आ जाते हैं, उसके बाद देखो तो ठुस्स ! ठुस्स क्यों ? कि जिससे बुद्धिशक्ति पुष्ट होती है उस चीज का नाश करते हैं जननांगों से । कई किशोरियों को प्रदर रोग, किशोरों को स्वप्नदोष घेर लेता है, यहाँ तक कि वे आत्महत्या के कगार तक भी पहुँच जाते हैं ऐसे अभागे हो जाते हैं ।

बच्चों की तबाही रुके इसलिए उनको सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा देता हूँ । दीक्षा में खास शर्त यह है कि ‘दिव्य प्रेरणा-प्रकाश पुस्तक पढ़ें-पढ़ायें ।’ साधक बच्चों को उस पुस्तक के गुण बतायें । दिव्य प्रेरणा-प्रकाश मतलब ब्रह्मचर्य की रक्षा, जीवन की रक्षा, परिवार की रक्षा, समाज की रक्षा, संस्कृति की रक्षा, मानवता की रक्षा, सर्व की रक्षा । 

जीवन का नाश करना हो तो गंदे विचार और गंदे कर्म करके रज-वीर्य का नाश करो, जल्दी तबाह हो जाओगे और संयमी बनोगे तो जल्दी उन्नत हो जाओगे । अगर धातु-नाश होता है या रज-वीर्य की कोई तकलीफ है तो सुबह खाली पेट कोमल भिंडी मिले तो दो भिंडी, बड़ी भिंडी मिले तो एक चबा-चबा के खा लो । इससे पानी पड़ने की, स्वप्नदोष की बीमारी को रोकने में सफल हो जाओगे । कई बहनों को प्रदररोग की तकलीफ होती है, उसमें फायदा होगा । चाय-कॉफी तुरंत छोड़ दो और भिंडी का उपयोग करो । यदि नहीं मिल पाती है तो आश्रम में शक्ति सुरक्षा वटी (टेबलेट) - ब्रह्मचर्य वटी मिलती है, वह लेकर रखो, उपयोग करो । दिव्य प्रेरणा-प्रकाश पुस्तक में अन्य उपाय भी बताये हैं । (यह आश्रमों में सत्साहित्य सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध है ।)

विनाश से विकास की ओर...

लोग बोलते हैं, ‘उन्नति का युग...’ पर मैं बोलता हूँ कि युवक-युवतियों की बरबादीवाला युग ऐसा कभी नहीं देखा । उनके हाथों से गाय का असली घी चला गया, दूध चला गया, सात्त्विक भोजन चला गया, सात्त्विक संस्कार चले गये, शुद्ध हवा भी चली गयी - प्रदूषित हो गयी, अब थोड़ा-बहुत बचा वह भी युवावस्था आयी तो वेलेंटाइन डे के निमित्त अथवा फिल्म की गंदी चाल के निमित्त ‘आई लव यू, आई लव यू...’ करके लड़का लड़की को, लड़की लड़के को फूल दें और गले लगें तो रज-वीर्य का नाश हो जाय ऐसा माहौल बनता जा रहा था । इस ‘लव यू’ के बहाने विदेश में तो कई लड़के-लड़कियाँ जवानी के पहले ही बीमार, बूढ़े जैसे हो जाते हैं । यह रोग भारत में भी चल पड़ा था । उसको हटाने के लिए मैंने मातृ-पितृ पूजन दिवस चालू किया । माता-पिता की पूजा करके बच्चे-बच्चियों का मन ऐसा भर आता है कि वह देखनेवालों के हृदय भी द्रवीभूत हो जाते हैं । 

मातृ-पितृ पूजन की राह दिखानेवाले...

भला हो तेरा सच्ची राह दिखानेवाले ।...

(भजन हेतु जायें इस लिंक पर - bit.ly/bhalahotera

यह भजन सुन के हृदय द्रवीभूत हो जाता है ।  14 फरवरी को तो खूब चलाओ । सच्ची राह देखनेवालों को भी धन्यवाद है ! दिखानेवाले का तो भला है ही है, सच्ची राह देखनेवाले का भी भला हो ! सच्ची राह पर चलनेवाले का तो परम भला हो जायेगा । ॐ ॐ ॐ...

भजन में आता है :

भला हो तेरा नींद से हमें जगानेवाले । 

मैं बोलता हूँ :

भला हो तुम्हारा नींद से जगनेवाले । 

14 फरवरी को क्या-क्या तबाही कर रहे थे... अभी देखो क्या परिवर्तन हो गया ! नहीं हुआ क्या ?

गाते हैं : 

‘भला हो तेरा सच्ची राह दिखानेवाले ।’

मैं बोलता हूँ :

भला हो तुम सभीका सच्ची राह पकड़नेवाले ।

मुझे तो सच्ची राह पकड़नेवालों की... अब वहाँ शब्द नहीं जाते । जब बच्चे माँ-बाप के गले लगते हैं तो वह दृश्य देख-देख के मैं तो भावसमाधि कहो, ज्ञानसमाधि कहो, दृश्यसमाधि कहो उसमें चला जाता हूँ । मुझे बड़ा आनंद आता है । कैसा भी कठोर हृदय हो पिघल जाता है । 

यह तुम्हारा मातृ-पितृ पूजन देखकर मेरा हृदय मेरे हाथ में नहीं रहता, मेरे दिलबर के साथ खेलने लगता है । फिर दिलबर और हम, दिल और दिलबर दो नहीं रहते हैं । मौज है कि नहीं है ? क्या आनंद है अपनी परमेश्वर सत्ता का, परमेश्वरीय माधुर्य का ! साधकों ने अपने रंग में अनजानों को भी रंग दिया, जानकार बना दिया । जब बुराई का तेज प्रचार होता है तो अच्छाई का तेज प्रचार करने से क्यों पीछे हटना ! 

विश्ववासियों ने सहर्ष स्वीकारा

‘आई लव यू, आई लव यू...’ तबाही की क्या आँधी आयी थी ! मुझे इस बात का संतोष है कि उस तबाही की आँधी को रोकने के लिए कोई मधुसूदन और कोई मीरा या मदालसा जैसे बच्चे-बच्चियाँ भी पैदा हों वह राह भी मैंने बतायी और देशवासियों ने ही नहीं, विश्ववासियों ने मेरी बतायी हुई वह राह सहर्ष स्वीकार की । मानव-जात का भविष्य अंधकारमय हो रहा था, उससे बचकर उज्ज्वल भविष्य की राह रोशन हो रही है । मुझे अपनी ईश्वरीय प्रेरणा पर गर्व है ।