Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

अमृतमय खीर का लाभ लें

शरद पूनम को चन्द्रमा की सात्त्विक तरंगें पृथ्वी पर आती हैं । आप लोग इसका फायदा उठाना । रात को आप खीर बना लेना । 200 ग्राम पके चावल में एक लीटर दूध डालकर 2-4 उफान आने तक गर्म करो । बन गयी खीर । बादाम, काजू, पिस्ता नहीं डालना, नहीं तो गुर्दों पर भार पड़ेगा । प्रति व्यक्ति 1-2 काली मिर्च दूध में उबालनी चाहिए, जिससे दूध का वायु-दोष दूर हो जाय । चन्द्रमा की चाँदनी में खीर 8.30 से 11 बजे तक (2-3 घंटे) रख देना, फिर थोड़ी खाना और बाकी सुबह खा लेना क्योंकि ज्यों देर रात होती है, त्यों जठराग्नि मंद होती है । खाते समय थोड़ा मेरी तरफ भी इशारा कर देना : ‘लो बाबा ! खाओ ।’ संत और भगवान तो भाव के भूखे हैं । उस समय भाव से तुम्हारा हृदय पवित्र होगा और भोजन प्रसाद बन जायेगा ।

            गाय का दूध पृथ्वी का अमृत माना जाता है लेकिन उसमें दुनियाभर की चीजें डालकर दूध को गाढ़ा करके खीर बनाना खाना खराब करना है । जितना गाढ़ा दूध उतना पचने में मुश्किल और उसका कुछ भाग नहीं पचा तो आम (अपक्व आहार रस) बन जाता है, जो आगे चलकर अनेक रोग, गाँठें (ट्यूमर), कैंसर बना देता है ।


                       शरद पूर्णिमा में पायें स्वास्थ्य-लाभ

            विजयादशमी के बाद एकादशी से पूर्णिमा तक केदिनों में चन्द्रमा में विशेष औषधि-पुष्टि के साथ-साथ प्रसन्नता और आरोग्यता की वृद्धि करनेवाला आभामंडल बनता है । इन दिनों में चन्द्रमा की चाँदनी को देखना हितकारी है । हो सके तो चाँदनी में सूई में धागा पिरोयें, इससे नेत्रज्योति बढ़ती है । चन्द्रमा की चाँदनी गर्भिणी स्त्रियों की नाभि पर पड़े तो गर्भस्थ शिशु विशेष प्रभावशाली व प्रसन्न होते हैं ।


गाय का घीशहद और त्रिफला - इनका मिश्रण करके चन्द्रमा की चाँदनी में रातभर रखो । सुबह काँच की बर्नी में रख दो (त्रिफला रसायन) । सुबह-शाम 10-10 ग्राम 40 दिन खाओ । मैंने तो 60 दिन खाया तो चश्मा उतर गया ।

            त्रिफला रसायनवाले त्रिफला रसायन बनायें, खीरवाले खीर को अमृतमय बना-बनाकर खायें, नेत्रज्योति बढ़ाने की इच्छावाले चन्द्रमा पर त्राटक करें परंतु सभी भगवच्चिंतन करते-करते आत्मज्योति, रसमय प्रभु की मंगलमय, मधुमय शांति, भक्ति, प्रीति में पावन जरूर होयें ।