महर्षि कश्यप ने कहा है :
न च आहारसमं किंचित् भैषज्यं उपलभ्यते ।
देश, काल, प्रकृति, मात्रा व जठराग्नि के अनुसार लिये गये आहार के समान कोई औषधि नहीं है । केवल सम्यक् आहार-विहार से व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घ आयु की प्राप्ति कर सकता है ।
प्रदीप्त जठराग्नि के कारण शीत ऋतु पौष्टिक व बलवर्धक आहार-सेवन के लिए अनुकूल होती है । इन दिनों में उपवास, अल्प व रूखा आहार सप्तधातु तथा बल का ह्रास करता है ।
शीतकाल में सेवन योग्य पुष्टिदायी व्यंजन
(१) गाजर का हलवा : गाजर में लौह तत्त्व व विटामिन ‘ए’ काफी मात्रा में पाये जाते हैं । यह वायुशामक, हृदय व मस्तिष्क की नस-नाड़ियों के लिए बलप्रद, रक्तवर्धक व नेत्रों के लिए लाभदायी है ।
विधि : गाजर के भीतर का पीला भाग हटा के उसे कद्दुकस कर घी में सेंक लें । आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर धीमी आँच पर पकायें । तैयार होने पर इलायची, मगजकरी के बीज व थोड़ी-सी खसखस डाल दें । (दूध का उपयोग न करें ।)
(२) कद्दू के बीज की बर्फी : काजू में जैसे मौलिक व पुष्टिदायी तत्त्व पाये जाते हैं, वैसे ही कद्दू के बीजों में भी होते हैं । बीज की गिरी को घी में सेंक के समभाग चीनी मिला के बर्फी या छोटे-छोटे लड्डू बना लें । एक-दो लड्डू सुबह चबा-चबाकर खायें ।
विशेष रूप से बालकों के लिए यह स्वादिष्ट, बल व बुद्धिवर्धक खुराक है ।
(३) खजूर की पुष्टिदायी गोलियाँ : सिंघाड़े के आटे को घी में सेंक लें । आटे के समभाग खजूर को मिक्सी में पीसकर उसमें मिला लें । हलका-सा सेंककर बेर के आकार की गोलियाँ बना लें । २-४ गोलियाँ सुबह चूसकर खायें, थोड़ी देर
बाद दूध पियें । इससे अतिशीघ्रता से रक्त की वृद्धि होती है । उत्साह, प्रसन्नता व वर्ण में निखार आता है । गर्भिणी माताएँ छठे महीने से यह प्रयोग शुरू करें । इससे गर्भ का पोषण व प्रसव के बाद दूध में वृद्धि होगी । माताएँ बालकों को हानिकारक चॉकलेट्स की जगह ये पुष्टिदायी गोलियाँ खिलायें ।
(४) वीर्यवर्धक योग : ४-५ खजूर रात को पानी में भिगो के रखें । सुबह १ चम्मच मक्खन, १ इलायची व थोड़ा-सा जायफल पानी में घिसकर उसमें मिला के खाली पेट लें । यह वीर्यवर्धक प्रयोग है ।
(५) मेथी की सुखड़ी : मेथीदाना हड्डियों व जोड़ों को मजबूत बनाता है । मेथी का आटा, पुराना गुड़ व घी समान भाग लें । आटा घी में सेंक के पुराना गुड़ व थोड़ी सोंठ मिलाकर सुखड़ी (बर्फी) बना लें । यह उत्तम वायुशामक योग हाथ-पैर, कमर व जोड़ों के दर्द, सायटिका तथा दुग्धपान करानेवाली माताओं व प्रौढ़ा व्यक्तियों के लिए विशेष लाभदायी है ।
(६) चन्द्रशूर की खीर : चन्द्रशूर (हालों) में प्रचंड मात्रा में लौह, फॉस्फोरस व कैल्शियम पाया जाता है । १२ वर्ष से ऊपर के बालकों को इसकी खीर बनाकर सुबह खाली पेट ४० दिन तक खिलाने से कद बढ़ाता है । माताओं को दूध बढ़ाने के लिए यह खीर खिलाने का परम्परागत रिवाज है । इससे कमर का दर्द, सायटिका व पुराने गठिया में भी फायदा होता है ।
सूचना : पौष्टिक पदार्थों का सेवन सुबह खाली पेट अपनी पाचनशक्ति के अनुसार करने से पोषक तत्त्वों का अवशोषण ठीक से होता है । उनका सम्यक् पाचन होने पर ही भोजन करना चाहिए ।