Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

तेल-मालिश से हृष्ट-पुष्ट बनना सिखाया

तेल-मालिश शरीर को निरोग व बलवान बनाने का सस्ता व सरल तरीका है । बापूजी ने तेल-मालिश की महत्ता बताकर मालिश का सही तरीका भी समझाया है । पूज्यश्री कहते हैं : ‘‘10 ग्राम तेल की मालिश करने से 80 ग्राम घी खाने की ताकत शरीर को मिलती है । पहले शौच जायें, फिर मालिश व स्नान करें ।

कौन-से दिन मालिश करने से क्या होता है, उसकी भी खोज कर ली आपके ऋषियों ने । रविवार को अगर तिल के तेल से मालिश करते हैं तो ताप पैदा होता है । सोमवार को मालिश सौंदर्य और स्वास्थ्य देती है । मंगलवार की मालिश मंगल ग्रह के प्रभाव से आयुष्य क्षीण करती है । बुधवार की मालिश बल और धन लाभ कराती है । गुरुवार की मालिश हानि करती है । शुक्रवार की मालिश क्षुब्धता देती है । शनिवार की मालिश बल एवं सुख दायक है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में रविवार को गुलाब के फूलों की पंखुड़ियाँ तथा गुरुवार को दूर्वा डालो तथा मंगल को मिट्टी और शुक्र को जरा-सा गोमय (गाय के गोबर का रस) डाल दिया तो वह दोष चला जायेगा । जो रोज तेल लगाते हैं उन्हें तेल में ये वस्तुएँ मिलाने की आवश्यकता नहीं है । ‘शिव पुराण’ के अनुसार उनके लिए किसी भी दिन तेल लगाना दूषित नहीं है । सरसों के तेल से मालिश ग्रहणकाल छोड़कर रोज की जा सकती है । (तेल-मालिश की विस्तृत जानकारी हेतु पढ़ें पुस्तक ‘आरोग्यनिधि’, भाग-1)

शरीर की मालिश के लिए अनेक प्रकार के तेल उपयोग में लाये जाते हैं । लौकी का तेल विशेष लाभकारी होता है ।

विधि : सवा किलो लौकी के छिलके उतार दो । कद्दूकश करो, फिर दबा-दबा के उसका पूरा रस निचोड़ लो । 250 ग्राम सरसों या तिल का तेल तप जाने के बाद उसे नीचे उतारकर उसमें वह लौकी का रस डाल दो । फिर लौकी के रस का जलीय अंश वाष्पीभूत हो जाने तक उसे बहुत धीमी आँच पर उबालो । यह तेल बादाम रोगन का भाई हो गया । मालिश करोगे तो यह आपके दिमाग व शरीर को ताकत देगा ।

मालिश के आधे घंटे बाद शरीर को रगड़-रगड़कर स्नान करें । हो सके तो जौ, तिल और आँवले का चूर्ण मिला के बनाया गया उबटन या सप्तधान्य उबटन अथवा तो देशी गाय के गोबर को शरीर पर रगड़ के स्नान करें ।’’