Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

औषधीय गुणों से परिपूर्ण: पारिजात

पारिजात या हरसिंगार को देवलोक का वृक्ष कहा जाता है । कहते हैं कि समुद्र-मंथन के समय विभिन्न रत्नों के साथ-साथ यह वृक्ष भी प्रकट हुआ था । इसकी छाया में विश्राम करनेवाले का बुद्धिबल बढ़ता है । यह वृक्ष नकारात्मक ऊर्जा को भी हटाता है । इसके फूल अत्यंत सुकुमार व सुगंधित होते हैं जो दिमाग को शीतलता व शक्ति प्रदान करते हैं । हो सके तो अपने घर के आसपास इस उपयोगी वृक्ष को लगाना चाहिए ।

पारिजात ज्वर व कृमि नाशक, खाँसी-कफ को दूर करनेवाला, यकृत की कार्यशीलता को बढ़ानेवाला, पेट साफ करनेवाला तथा संधिवात, गठिया व चर्मरोगों में लाभदायक है ।

औषधीय प्रयोग

पुराना बुखार : इसके 7-8 कोमल पत्तों के रस में 5-10 मि.ली. अदरक का रस व शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से पुराने बुखार में फायदा होता है ।

बच्चों के पेट में कृमि : इसके 7-8 पत्तों के रस में थोड़ा-सा गुड़ मिला के पिलाने से कृमि मल के साथ बाहर आ जाते हैं या मर जाते हैं ।

जलन व सूखी खाँसी : इसके पत्तों के रस में मिश्री मिला के पिलाने से पित्त के कारण होनेवाली जलन आदि विकार तथा शहद मिला के पिलाने से सूखी खाँसी मिटती है ।

बुखार का अनुभूत प्रयोग : 30-35 पत्तों के रस में शहद मिलाकर 3 दिन तक लेने से बुखार में लाभ होता है ।

सायटिका व स्लिप्ड डिस्क : पारिजात के 60-70 ग्राम पत्ते साफ करके 300 मि.ली. पानी में उबालें । 200 मि.ली. पानी शेष रहने पर छान के रख लें । 25-50 मि.ग्रा. केसर घोंटकर इस पानी में घोल दें । 100 मि.ली. सुबह-शाम पियें । 15 दिन तक पीने से सायटिका जड़ से चला जाता है । स्लिप्ड डिस्क में भी यह प्रयोग रामबाण उपाय है । वसंत ऋतु में ये पत्ते गुणहीन होते हैं अतः यह प्रयोग वसंत ऋतु में लाभ नहीं करता ।

संधिवात, जोड़ों का दर्द, गठिया : पारिजात की 5 से 11 पत्तियाँ पीस के एक गिलास पानी में उबालें, आधा पानी शेष रहने पर सुबह खाली पेट 3 महीने तक लगातार लें । पुराने संधिवात, जोड़ों के दर्द, गठिया में यह प्रयोग अमृत की तरह लाभकारी है । अगर पूरी तरह ठीक नहीं हुआ तो 10-15 दिन छोड़कर पुनः 3 महीने तक करें । इस प्रयोग से अन्य कारणों से शरीर में होनेवाली पीड़ा में भी राहत मिलती है । पथ्यकर आहार लें ।

चिकनगुनिया का बुखार होने पर बुखार ठीक होने के बाद भी दर्द नहीं जाता । ऐसे में 10-15 दिन तक पारिजात के पत्तों का यह काढ़ा बहुत उपयोगी है ।