- पूज्य संत श्री आशारामजी बापू
किसी भी प्रकार के वातरोग के लिए यह उपाय आजमाया जा सकता है : पहली उँगली (तर्जनी) हाथ के अँगूठे के ऊपरी सिरे पर रखो और तीन उँगलियाँ सीधी रखो । ऐसे ज्ञान मुद्रा करो । अब दायें नथुने से श्वास लिया और बायें से छोड़ा, फिर बायें से लिया और दायें से छोड़ा ।
तत्पश्चात् बायाँ नथुना बंद करके दायें नथुने से खूब श्वास भरो । उसके बाद घुटने, कमर आदि जहाँ कहीं भी वातरोग का असर हो, उस अंग को हिलाओ-डुलाओ । भरे हुए श्वास को सवा से पौने दो मिनट रोके रखो (नये अभ्यासक 30-40 सेकंड से शुरू कर अभ्यास बढ़ाते जायें) फिर बायें नथुने से निकाल दो । ऐसे 10 बार प्राणायाम करो तो दर्द में फायदा होगा ।
एलोपैथी की दवाई रोग को दबाती है जबकि आसन, प्राणायाम, उपवास, तुलसी या आयुर्वेदिक औषधि आदि रोग की जड़ निकालकर फेंक देते हैं । इन उपायों से जो फायदा होता है वह एलोपैथी के कैप्सूल्स, इंजेक्शन्स आदि से नहीं होता । इतना ही नहीं, लम्बे समय तक एलोपैथिक दवाइओं का सेवन करनेवाले को अनेक प्रकार की हानियों का शिकार होना पड़ता है ।
(आश्रम की पुस्तक ‘जीवनोपयोगी कुंजियाँ’ से)
Ref: ISSUE300-DECEMBER-2017