Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

स्वास्थ्य व सत्त्व वर्धक बिल्वपत्र

बिल्वपत्र (बेल के पत्ते) उत्तम वायुशामक, कफ-निस्सारक व जठराग्निवर्धक हैं । ये कृमि व शरीर की दुर्गंध का नाश करते हैं । बिल्वपत्र ज्वरनाशक, वेदनाहर, संग्राही (मल को बाँधकर लानेवाले) व सूजन उतारनेवाले हैं । ये मूत्रगत शर्करा को कम करते हैं, अतः मधुमेह में लाभदायी हैं । बिल्वपत्र हृदय व मस्तिष्क को बल प्रदान करते हैं । शरीर को पुष्ट व सुडौल बनाते हैं । इनके सेवन से मन में सात्त्विकता आती है ।

कोई रोग न भी हो तो भी नित्य बिल्वपत्र या इनके रस का सेवन करें तो बहुत लाभ होगा । बेल के पत्ते काली मिर्च के साथ घोट के लेना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हितकर है । इनके रस में शहद मिलाकर लेना भी लाभकारी है ।

औषधीय प्रयोग

मधुमेह (डायबिटीज) : बिल्वपत्र के 10-15 मि.ली. रस में 1 चुटकी गिलोय का सत्त्व एवं 1 चम्मच आँवले का चूर्ण मिला के लें ।

स्वप्नदोष : बेलपत्र, धनिया व सौंफ समभाग लेकर कूट लें । यह 10 ग्राम मिश्रण शाम को 125 मि.ली. पानी में भिगो दें । सुबह खाली पेट लें । इसी प्रकार सुबह भिगोये चूर्ण को शाम को लें । स्वप्नदोष में शीघ्र लाभ होता है । प्रमेह एवं श्वेतप्रदर रोग में भी यह लाभकारी है ।

धातुक्षीणता : बेलपत्र के 3 ग्राम चूर्ण में थोड़ा शहद मिला के सुबह-शाम लेने से धातु पुष्ट होती है ।

मस्तिष्क की गर्मी : बेल की पत्तियों को पानी के साथ मोटा पीस लें । इसका माथे पर लेप करने से मस्तिष्क की गर्मी शांत होगी और नींद अच्छी आयेगी ।