Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

मुनक्का एवं किशमिश

अंगूर को जब विशेषरूप से सुखाया जाता है तब उसे मुनक्का कहते हैं । अंगूर के लगभग सभी गुण मुनक्के में होते हैं । यह दो प्रकार का होता है - लाल और काला । मुनक्का पचने में भारी, मधुर, शीतल, वीर्यवर्धक, तृप्तिकारक, वायु को गुदाद्वार से सरलता से निकालनेवाला, कफ-पित्तहारी, हृदय के लिए हितकारक, श्रमनाशक, रक्तवर्धक, रक्तशोधक, मलशोधक तथा रक्तपित्त व रक्त-प्रदर में भी लाभदायी है ।

किशमिश भी सूखे हुए अंगूर का दूसरा रूप है । इसमें भी अंगूर के सारे गुण विद्यमान होते हैं । दूध के लगभग सभी तत्त्व किशमिश में पाये जाते हैं । दूध के अभाव में इसका उपयोग किया जा सकता है । किशमिश दूध की अपेक्षा शीघ्र पचती है । मुनक्के के नित्य सेवन से थोड़े ही दिनों में रस, रक्त, शुक्र आदि धातुओं तथा ओज की वृद्धि होती है । वृद्धावस्था में किशमिश या मुनक्के का प्रयोग न केवल स्वास्थ्य की रक्षा करता है बल्कि आयु को बढ़ाने में भी सहायक होता है । किशमिश और मुनक्के की शर्करा शरीर में अतिशीघ्र पचकर आत्मसात् हो जाती है, जिससे शीघ्र ही शक्ति व स्फूर्ति प्राप्त होती है ।

१०० ग्राम किशमिश में ७७ मि.ग्रा. लौह तत्त्व, ८७ मि.ग्रा. कैल्शियम, २ ग्राम खनिज तत्त्व तथा ३०८ किलो कैलोरी ऊर्जा पायी जाती है ।

किशमिश एवं मुनक्के के कुछ स्वास्थ्य-प्रदायक प्रयोग

दौर्बल्य : अधिक परिश्रम, कुपोषण, वृद्धावस्था या किसी बड़ी बीमारी के बाद शरीर जब क्षीण व दुर्बल हो जाता है, तब शीघ्र बल प्राप्त करने के लिए किशमिश बहुत ही लाभदायी है । २० ग्राम किशमिश पानी में भिगोकर रखें व दो घंटे बाद खा लें ।

रक्ताल्पता : मुनक्के में लौह तथा सभी जीवनसत्त्व (विटामिन्स) प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं । १०-१५ ग्राम काला मुनक्का एक कटोरी पानी में भिगोकर रखें । इसमें थोड़ा-सा नींबू का रस मिलायें । ४-५ घंटे बाद मुनक्का चबा-चबाकर खायें, इससे रक्ताल्पता मिटती है ।

अम्लपित्त : किशमिश मधुर, स्निग्ध, शीतल व पित्तशामक है । इसे पानी में भिगोकर बनाया गया शरबत सुबह-शाम लेने से पित्तशमन, वायु-अनुलोमन व मल-निस्सारण होता है, जिससे अम्लपित्त में शीघ्र ही राहत मिलती है । रक्तपित्त, दाह व जीर्णज्वर में भी यह प्रयोग लाभदायी है । इसके सेवन के दिनों में आहार में पाचनशक्ति के अनुसार गाय के दूध तथा घी का उपयोग करें ।

कब्ज : किशमिश में उपस्थित मैलिक एसिड मल-निस्सारण का कार्य करता है । २५ से ३० ग्राम किशमिश व १ अंजीर रात को २५० मि.ली. पानी में भिगोकर रखें । सुबह खूब मसलकर छान लें । फिर उसमें आधा चम्मच नींबू का रस व २ चम्मच शहद मिलाकर धीरे-धीरे पियें । कुछ ही दिनों में कब्ज दूर हो जायेगा ।

शराब के नशे से छुटकारा : शराब पीने की इच्छा हो तब शराब की जगह १० से १२ ग्राम किशमिश चबा-चबाकर खाते रहें या किशमिश का शरबत पियें । शराब पीने से ज्ञानतंतु सुस्त हो जाते हैं परंतु किशमिश के सेवन से उन्हें शीघ्र ही पोषण मिलने से मनुष्य उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करने लगता है । यह प्रयोग प्रयत्नपूर्वक करते रहने से कुछ ही दिनों में शराब छूट जाती है ।

आवश्यक निर्देश : किशमिश, मुनक्का व अंजीर को अच्छी तरह से धोने के बाद ही उपयोग करें, जिससे धूल-मिट्टी, कीड़े, जंतुनाशक दवाइयों का प्रभाव आदि निकल जायें ।