Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

पित्तजन्य व्याधियाँ दूर करने के सरल उपाय

(1) अम्लपित्त (hyperacidity) व उलटी : भोजन के बाद हरड़ रसायन* की 2-2 गोलियाँ चूसें । रात को सोते समय 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण या 4 त्रिफला टेबलेट लें । सुबह-शाम खाली पेट 2-3 चम्मच आँवला रस* आधा कप पानी में आवश्यकता-अनुसार मिश्री मिला के लें अथवा आँवला चूर्ण* (मिश्रीयुक्त) लें । खुलकर भूख लगने पर सुपाच्य व उचित मात्रा में आहार लेने से अम्लपित्त से रक्षा होती है । (रविवार को आँवले का सेवन वर्जित है, शुक्रवार को कम लें ।)

(2) जलन : आँखों में, पेशाब में जलन हो तो दूध में शतावरी चूर्ण, मिश्री या गुलकंद मिला के सुबह-शाम खाली पेट लें (भोजन और दूध के बीच 2 घंटे का अंतर रखें) । 

(3) अत्यधिक प्यास : 12-15 काली द्राक्षा अथवा किशमिश 3-4 बार अच्छे-से धोकर 1-2 घंटे पानी में भिगोयें । फिर इन्हें मुँह में रख के कुछ देर तक चूसें, बाद में खा लें ।

(4) बुखार : उपवास करें । बुखार उतरने पर मोठ या मूँग की दाल का सूप लें । आधा चम्मच महासुदर्शन चूर्ण** दिन में 2-3 बार लें ।

(5) चिड़चिड़ापन एवं सिरदर्द : 2 से 5 ग्राम शतावरी चूर्ण सुबह-शाम लें । पैरों के तलवों व सिर में घी की मालिश करें । सुबह-शाम नाक में 2-2 बूँद घी डालना (नस्य लेना) भी हितकारी है । 

(6) नींद कम आना : पैरों के तलवों में व माथे पर नारियल तेल, आँवला-भृंगराज केश तेल* या ब्राह्मी तेल** की मालिश करें । सुबह नाक में गाय के घी की 1-2 बूँद डालें । रात में ब्राह्मी चूर्ण** व जटामांसी चूर्ण** समभाग मिला के 1-2 ग्राम लें तथा ऊपर से भैंस का दूध पियें । 

(7) नकसीर फूटना : सिर पर पानी के छींटे मारें । अड़ूसा का 50 मि.ली. ताजा रस (अथवा 15-20 मि.ली. अड़ूसा अर्क*) दिन में 2-3 बार लें । नाक में दूर्वा घास या हरे धनिये के रस की 2-2 बूँदें डालें ।ी

 

* ये आश्रमों में सत्साहित्य सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध हैं ।